बुनियादी भाषा और साक्षरता New topic wise discussion 2022

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बुनियादीभाषा और साक्षरता क्या है ?

बच्चे के भाषा विकास में बुनियादी महत्व रखने वाली बातों को हम बुनियादी भाषा कह रहे हैं। बुनियादी भाषा शिक्षण में एक ओर तो मौखिक अभिव्यक्ति को कविता, कहानी, दैनिक अनुभव, मन की बात आदि के सहारे बेहतर किया जाता है और साथ ही एक मुख्य अपेक्षा लिपि से परिचय होना होता है।

बच्चे ध्वनिऔर उसके लिए निर्धारित चिह्ढों में सम्बन्ध बिठा पायें; अक्षर/वर्णमाला, सरल शब्दों और सरल वाक्‍्यों को पढ़, लिख और समझ पायें। इस प्रकार पढ़ने-लिखने के जगत से उनका बुनियादी परिचय हो जाये। दूसरे शब्दों में कक्षा तीन तक के लिए जो भाषा शिक्षण के उद्देश्य हैं, वे बुनियादी भाषा शिक्षण के दायरे में देखरहे हैं।

प्राथमिक कक्षाओं में भाषा शिक्षण समूची शिक्षा का एक महत्वपूर्ण चरण है। यदि इस चरण में बच्चों के साथ भाषा के निर्धारित उद्देश्यों के मुताबिक काम नहीं हुआ तो बच्चे अगली कक्षाओं तक आते-आते भी पढ़ना-लिखना नहीं सीख पाते और इसका प्रभाव उनकी आगे की कक्षाओं में पढ़ने-लिखने की प्रक्रियाओं के साथ ही साथ अन्य विषयों की शिक्षा पर भी दिखाई देता है। भाषा शिक्षण के उद्देश्यों को ध्यान से देखें तो स्पष्ट होता है कि प्राथमिक कक्षाओं में भाषा का शिक्षण अपने
मूलरूप में भाषा से जुडे कतिपय महत्वपूर्ण कौशलों का शिक्षण है। प्राथमिक कक्षाओं में भाषा शिक्षण के प्रमुख अवयवों को ध्यान में रखें तो इससे संबन्धित प्रमुख कक्षा प्रक्रियाओं को समझना आवश्यक हो जाता है।

7बुनियादी भाषा और साक्षरता का मुख्य उद्देश्य क्या है ?

  1. मौखिक भाषा का विकास,
  2. दूसरों की कही/लिखी सरल बात को समझ पाना और अपेक्षित उत्तर दे पाना, सम्बन्धों की समझ,
  3. ध्वनि और उसके लिए निर्धारित लिपि चिट्ढों में शुरुआती पढ़ना-लिखना, सरल वाक्‍्यों में अपनी बात को मौखिक व लिखित रूप में व्यक्त कर पाना।
  4. शुरुआती पढ़ना-लिखना, सरल वाक्‍्यों में अपनी बात को मौखिक व लिखित रूप में व्यक्त कर पाना।

6प्राथमिक कक्षाओं में भाषा शिक्षण की प्रमुख कक्षा प्रक्रियाएँ क्या है ?

  1. भाषा शिक्षण में भाषायी समृद्ध कक्षा (प्रिंट रिच माहौल) का उपयोग,
  2. भाषा शिक्षण में कविताओं, कहानियों, अनुभवों का उपयोग, भाषा शिक्षण में पाठ्यपुस्तक एवं अन्य सहायक सामग्री का उपयोग
  3. भाषा शिक्षण में बातचीत एवं चर्चा का उपयोग,
बुनियादी भाषा और साक्षरता
What is बुनियादी भाषा और साक्षरता

5बुनियादी भाषा और साक्षरता विकास के मुख्य स्तंभ क्या है ?

  1. मौखिक भाषा विकास – हम मौखिक भाषा को अकसर ही केवल संवाद की प्रक्रिया तक सीमित कर देते हैं, किन्तु वास्तव में ऐसा नहीं है।
  • भाषा हमारी सभी मानसिक क्रियाओं के मूल में है यानी हम जो भी सोचते हैं, कल्पना करते हैं, तर्क, विश्लेषण, तुलना, सवाल-जवाब, कार्य-कारण संबंध बनाना आदि मानसिक क्रियाएँ करते हैं सभी कुछ भाषा की मदद से ही करते हैं।
  • बच्चों में मौखिक भाषा विकास का मतलब है मानसिक क्रियाओं का विकास। इसके अलावा अपनी बात को सही तरीके से अभिव्यक्त करना, सवाल पूछना और सवालों को समझ कर उनका जवाब देना, किसी घटना को सही क्रम में बता
    पाना, भाषा के छोटे घटकों की पहचान करना आदि सभी कुछ मौखिक भाषा विकास का हिस्सा है।
  • मौखिक भाषा विकास को मात्र कुछ गतिविधियों तक सीमित कर देना इसके महत्व और सम्पूर्ण क्षमता को बहुत छोटे दायरे में सीमित कर देने जैसा है। बच्चे का मौखिक भाषा विकास जितना बेहतर होगा बच्चे के लिए पढ़ना लिखना सीखना उतना आसान और गुणवत्तापूर्ण होगा।

2. लिपि संरचना की निपुणता– लिपि संरचना की निपुणता के अंतर्गत लिपि की एक व्यवस्था पर पूरी पकड़ होना शामिल है। जिसमें लिपि चिन्हों की बनावट की समझ, लिपि चिन्हों की उसकी थ्वनि से संबंध की समझ, लिपि से शब्दों के बनने, शब्दों से वाक्य बनने के नियमों की समझ, धाराप्रवाह एवं स्वतंत्र रूप से पढ़ने और लिखने के लिए आवश्यक सभी तरीकों और नियमों की समझ शामिल है।

3. विविध प्रकार की लिखित सामग्री से परिचय– इसका अर्थ यह है कि बच्चों को पाठ्यपुस्तक के अलावा भी अलग अलग प्रकार की लिखित सामग्री से रूबरू करवाना बहुत जरूरी है। इसके अंतर्गत विभिन्‍न संदर्भों से कहानी, कविता, अखबार, दैनिक जीवन में उपयोगी लिखित सामग्री, बड़े बच्चों द्वारा लिखी गयी सामग्री, विभिन्न प्रकार के चित्र और पोस्टर आदि आते हैं। शुरुआत से ही बच्चों को विविध प्रकार की लिखित सामग्री देना उनके पढ़ना – लिखना सीखने के अनुभव को और पुख्ता करती है। इसमें ऐसे बच्चों को भी अनिवार्यतः शामिल किया जाना चाहिए जिन्हें अभी पढ़ना लिखना नहीं आता।

4 बुनियादी भाषा और साक्षरता विकास के मुख्य सिद्धान्त क्या है ?

  • बच्चों की मातृभाषा को उचित स्थान देते हुए स्कूली भाषा से जोड़ना।
  • कक्षा में भाषा सीखने के लिए भयमुक्त माहौल उपलब्ध करवाना।
  • समझ के साथ व उचित गति से पढ़ना।
  • पढ़ने व लिखने संबंधित स्पष्ट निर्देश देना।
  • वर्णो/ लिपि चिह्वों को सन्दर्भ को आधार बनाकर व्यवस्थित तरीके से सिखाना।
  • बुनियादी भाषा सीखने में शुद्धतावादी नजरिए के प्रति अतिआग्रह नहीं रखना चाहिए।
  • बच्चों को भाषा के उपयोग करने के अधिकाधिक अवसर दिये जाए जहां वे गलतियाँ ” आछ भी सीखे।
  • भाषा शिक्षण से संबन्धित शिक्षण अधिगम सामग्री का उपयोग करना।
  • दायित्वों का क्रमिक हस्तांतरण कौशलों के विकास में।
  • बच्चों को आवश्यकतानुसार सहायता प्रदान करना।
  • अभ्यास के बार-बार अवसर प्रदान करना।
  • सतत्‌ अवलोकन करना।
  • प्रिंट समृद्ध वातावरण का निर्माण के अवसर उपलब्ध करवाना।
What is बुनियादी भाषा और साक्षरता 2

3 भाषायी कौशलों का अंतर्सम्बन्ध क्या है ?

आम धारणा है कि बच्चों में बुनियादी भाषा और साक्षरता विकसित करने के लिए पहले सुनना, फिर बोलना, फिर पढ़ना और फिर लिखना किया जाना चाहिए। भाषा सीखने में हुए शोध इस धारणा को नकारते हैं और यह साबित किया जा चुका है कि ये सभी एक के बाद एक नहीं बल्कि सभी एक साथ ही विकसित होते हैं।

बुनियादी भाषा और साक्षरता की अपनी समझ को बेहतर करने के लिए हमें इस बात को ठोस रूप से समझना और स्वीकार करना होगा। कक्षा में बुनियादी भाषा और साक्षरता विकास के लिए किए जाने वाली सभी गतिविधियों में सुनने, बोलने, पढ़ने और लिखने से संबन्धित सभी तत्वों को हर दिन की कक्षा का हिस्सा बनाना आवश्यक है। इसके लिए एक अच्छी तरह से तैयार की गयी व्यवस्थित शिक्षण रणनीति की आवश्यकता होगी।

इन कौशलों में कक्षा कार्य की शुरुआत कहीं से भी हो सकती है। लेकिन शुरुआत जहाँ से भी हो, वहाँ
से बाकी कौशलों की ओर बढ़ना चाहिए। उदाहरण के लिए यदि कुछ पढ़ा जाये तो उसके आधार पर
बोलने-सुनने पर काम हो और फिर लिखने तक जाने का भी प्रयास हो। इसी प्रकार बोलने-सुनने से
शुरू करके पढ़ने लिखने की प्रक्रिया तक आया जाए और फिर लिखे हुए के आधार पर पढ़ने और
बोलने सुनने पर कार्य हो सकता है।

2बुनियादी भाषा और साक्षरता के विभिन्‍न घटक क्या है ?

पठन, लेखन और संख्यात्मक आधारभूत गणन कार्यों को करने की क्षमता भावी स्कूली शिक्षा एवं जीवनपर्य॑त शिक्षण के लिए आवश्यक नींव और अपरिहार्य पूर्वापिक्षा है। भाषा का पूर्व ज्ञान भाषा में साक्षरता कौशल के निर्माण में सहायता करता है। जिन बच्चों की अपनी गृह भाषा में मजबूत पकड़ होती है वे अंग्रेजी/द्वितीय भाषा को और अधिक सरलता से सीख सकते हैं। इसके अलावा, बुनियादी साक्षरता कौशलों को स्कूल में पोषित किया जाता है और अधिकतर यह उस भाषा के प्रति अध्यापकों की समझ एवं दृष्टिकोण पर निर्भर करता है जिस भाषा को बच्चे स्कूल में लेकर आते हैं अर्थात्‌ जो उनकी गृह भाषा होती है।

1निपुण भारत दस्तावेज 2021 के अनुसार बुनियादी भाषा और साक्षरता के मुख्य घटक क्या है ?

निपुण भारत दस्तावेज 2024 के अनुसार बुनियादी भाषा और साक्षरता के मुख्य घटक निम्नानुसार हैं-

  1. मौखिक भाषा विकास: बच्चों को अपनी भाषा में सुनने और बोलने के कौशलों का विकास इसका भाग हैं इन्हें कविता, कहानी चर्चा, विषय, चित्र चर्चा आदि के माध्यम से बोलने के अवसर देकर विकसित किया जा सकता है।
  2. ध्वनि संबंधी जागरूकता: बोले जाने वाले शब्द की ध्वनी संरचना का ज्ञान होना। इन्हें आवाजों को सुनने, गिनने, पहचानने, जोड़ने, और शब्दों में ध्वनियों को बदलने आदि खेलों के माध्यम से विकसित किया जा सकता है।
  3. डिकोडिंग: इसमें ध्वनी और लिपि चिन्हों के आपसी सह-सम्बन्ध, अक्षर ज्ञान, शब्द पहचान, प्रिंट या छपी सामग्री की समझ व उपयोग का ज्ञान शामिल है। इस कौशल को बच्चों के साथ अक्षर पहचान, शब्द पठन आदि अभ्यासों के माध्यम से विकसित किया जा सकता है।
  4. शब्द-भंडार: मौखिक और लिखित रूप से नए शब्द सीखना, उनके अर्थ का समझना व विभिन्‍न संदर्भो में शब्दों को उपयोग कर पाना शामिल है। बच्चों के साथ सार्थक संदर्भों में शब्दावली विकास पर कार्य किया जा सकता है।
  5. पढ़कर समझना: किसी भी लिखी / छपी हुए सामग्री को पढ़कर उससे विभिन्‍न स्तर पर अर्थ गढ़ पाने की योग्यता शामिल है बच्चों के साथ कहानियों, गहन चिंतन एवं विश्लेषण आधारित मौखिक चर्चाओं आदि के माध्यम से इस कौशल को विकसित किया जा सकता है।
  6. धाराप्रवाह पठन: किसी भी लिखी / छपी हुई सामग्री को उचित गति , शुद्धता और उपयुक्त हावभाव के साथ पढना जिससे अर्थ गढ़ने में आसानी हो , धारा प्रवाह के अंतर्गत आता है। बच्चों के साथ अलग – अलग पठन गतिविधियों के सघन अभ्यास से इसे विकसित किया जा सकता है।
  7. लिखी / छपी सामग्री के प्रति जागरूकता: समझ के कौशल को विकसित करने के लिए बच्चों को विभिन्न प्रकार के प्रिंट समृद्ध वातावरण के संपर्क की आवश्यकता होती है।
  8. लेखन: वर्ण, शब्द , वाक्य आदि पर कौशल आधारित लेखन कार्य और अपने विचारों को स्वतंत्र रूप से लिखकर व्यक्त कर पाना इसमें शामिल होता है।
  9. पठन संस्कृति का विकास (कल्चर ऑफ़ रीडिंग) : इसमें भिन्न-भिन्न पुस्तकों और अन्य पठन सामग्रियों से जुड़ने की प्रेरणा शामिल है। बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण बाल साहित्य, भाषा समृद्ध वातावरण और पुस्तकालय गतिविधियों के माध्यम से उनमें पढने की ललक और आदत का विकास किया जा सकता है।
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Most Important Question and Answer

1.कौन से वर्ष तक बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मकता हासिल करने की लक्ष्य रखा गया है?

Answer- 2026-27

2. हम सवालों के जवाब, समस्या का समाधान, कुछ नया जानने की प्रक्रिया में क्या कर रहे होते हैं?

Answer- अवलोकन एवं तुलना, तर्क एवं अनुमान लगाना , विशलेषण

3. बुनियादी साक्षरता के तीन आधार स्तंभ कौन से हैं?
Answer- a.  मौखिक भाषा विकास
b. लेखन एवं वर्तनी संबंधी निपुणता
c. विविध प्रकार की पठन सामग्री का एक्सपोज़र

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