Top 3 important facts about विद्यालय तत्परता / School Readiness क्या है ?

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विद्यालय तत्परता /School Readiness – औपचारिक स्कूली शिक्षा प्रणाली में प्रवेश करने वाले सभी बच्चों के लिए स्कूल की तैयारी आवश्यक है। एक बार जब बच्चा उम्र की उचित अवस्था/दहलीज को हासिल कर लेता है, तो उसे औपचारिक स्कूली शिक्षा प्रणाली में शामिल होने के लिए तैयार रहना चाहिए। सामाजिक रूप से कहा जाय तो, स्कूल जाना उन कई संस्कारों में से एक है जिनसे होकर एक बच्चा गुजरता है।

इसमें विलगाव-संस्कार या संक्रमण-काल के पूर्व का चरण (जब बच्चा स्कूल के बारे में बात करना शुरू करता है, स्कूल के लिए आवश्यक चीजें खरीदता है, स्कूल के बारे में उत्साहित होता है), संक्रमण-संस्कार या सीमांत चरण (बच्चे को शिक्षक से मिलवाना, माता-पिता से अलग होना) और समावेशन- संस्कार या उत्तर सीमान्त चरण के बाद के संस्कार (स्कूल के पहले दिन के पूरा होने का जश्न, स्कूल जाने वाले बच्चे की भूमिका के लिए अभ्यस्त होना) शामिल हैं|

हालांकि, ऐसे संस्कारों से गुजरने से पहले बच्चे को शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक और सामाजिक रूप से स्कूल के लिए तैयार होना चाहिए। बच्चे को ‘स्कूल के लिए तैयार’ माने जाने के लिए, उनके साथ कुछ विशिष्ट गतिविधियाँ की जा सकती हैं ताकि वे सीखने के एक नए स्तर और एक नए सामाजिक वातावरण में प्रवेश करने के लिए बेहतर ढंग से सुसज्जित हों।

इसके अलावा, बच्चे में एक निश्चित ‘सीखने की तत्परता’ पैदा करनी होगी ताकि बच्चा अधिक जटिल अवधारणाओं को सीखना शुरू करने के लिए तैयार हो | यह तत्परता मूल रूप से एक ऐसी अवस्था है जहाँ बच्चा बिना किसी भावनात्मक तनाव के खुशी से सीखने के लिए तैयार होता है। ऐसी अवस्था तक पहुँचने के लिए बच्चे के साथ तीन बुनियादी प्रकार की स्कूली तैयारी पर काम करना पड़ता है –

School Readiness

School Readiness / विद्यालय तत्परता में पढ़न कौशल क्या है 

विद्यालय तत्परता में पढ़ने की तैयारी वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से एक बच्चे को अक्षरों को सही ढंग से पहचानना शुरू करने के लिए तैयार किया जाता है, यह समझता है कि वे अक्षर शब्द कैसे बनाते हैं और अंत में जान पाता है कि वाक्य का निर्माण कैसे होता है। इस अवस्था में बच्चे के पूरी तरह से पढ़ने में सक्षम होने की उम्मीद नहीं की जाती है; वह केवल अक्षरों की पहचान करना शुरू करता है और उन अक्षरों से कैसी ध्वनि उत्पन्न होती है।

आरम्भ में बच्चे चित्रों से शुरूआत करते हैं और चित्रों की भिन्‍नता को पकड़ते हैं। फिर वे आकृतियों में अंतर करना शुरू करते हैं और अंत में वे अक्षरों के बीच अंतर करना सीखते हैं। इस क्रम का पालन किया जाता है ताकि बच्चा ‘ज्ञात से अज्ञात’ अवधारणा की ओर बढ़े | एक बार जब बच्चा उन वस्तुओं को जिन्हें वह प्रतिदिन देखता है और परिचित होता है उनके बीच अंतर कर सकता है, तब आकार पेश किए जाते हैं, जो कि बच्चे के लिए एक अपेक्षाकृत अज्ञात अवधारणा है। अंत में, बच्चे को अक्षर पेश किए जाते हैं। रीडिंग रेडीनेस के अंतर्गत शामिल प्रक्रियाएं हैं:

विद्यालय तत्परता
विद्यालय तत्परता
  1. दृश्य भेद का सम्बन्ध इससे है कि बच्चे सचेत रूप से यह पहचानना शुरू कर सकें कि सभी वस्तुएं एक अलग आकार की हैं| यह सीखने की प्रक्रिया बच्चे द्वारा देखी जाने वाली रोजमर्रा की वस्तुओं या जीवित प्राणियों के चित्रों में अंतर करने के साथ शुरू होती है, फिर आकृतियों (वृत्त, वर्ग और त्रिभुज) और अंत में अक्षरों की ओर बढ़ती है। यह प्रक्रिया अंततः बच्चे को पढ़ना शुरू करते समय विभिन्‍न अक्षरों के बीच अंतर करने में मदद करती है।
  2. श्रवण भेद वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा बच्चा अलग-अलग अक्षरों से संबंधित विभिन्‍न ध्वनियों के बीच अंतर करना शुरू कर देता है। यह पढ़ने की तैयारी करते समय भी बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि ध्वनियों को जानने से बच्चे को प्रत्येक अक्षर को एक अलग पहचान देने में मदद मिलती है।
  3. दृश्य और श्रव्य निविष्टियों का सम्बन्ध पठन तत्परता का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है। जब बच्चा एक अक्षर को ध्वनि से जोड़ना शुरू कर देता है और अब वह एक अक्षर को देख सकता है और उसे उस ध्वनि से जोड़ सकता है जो उस शब्द लिए उपयुक्त है।
  4. पढ़ते समय बाएं से दाएं की गति की पहचान आमतौर पर पढ़ने की तैयारी का अंतिम चरण होता है। बच्चा समझता है कि पढ़ने में सक्षम होने के लिए उसे एक तरफ से एक वाक्य पढ़ना चाहिए, न कि दूसरी तरफ से। बच्चे को यह समझना चाहिए कि पढ़ना बाएँ से दाएँ और ऊपर से नीचे की ओर होता है। (यह प्रक्रिया लेखन तैयारी का भी एक हिस्सा है)

School Readiness/ विद्यालय तत्परता में लेखन कौशल क्या है

विद्यालय तत्परता में लेखन तैयारी एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके माध्यम से एक बच्चा उस तरीके से परिचित होता है जिस तरीके से हम लिखने के लिए अपने हाथों का उपयोग करते हैं, एक कलम कैसे पकड़ी जाती है आदि। इस स्तर पर, एक बच्चा मुख्य रूप से केवल आड़ी-तिरछी रेखाएँ खिंचने का उपक्रम करेगा और वास्तव मे उससे अभी तक लिखने की उम्मीद नहीं करनी है, हालांकि कुछ बच्चे छोटे शब्द और नाम लिखना शुरू कर देते हैं। लेकिन इस प्रक्रिया के अंत मे बच्चे को कुछ कौशल हासिल करना होता है जो अंततः बच्चे को स्कूल में ठीक से लिखना शुरू करने में मदद करेगा।

 विद्यालय तत्परता में लेखन कौशल

बच्चे में ठीक तरह से सूक्ष्म मोटर कौशल का विकास होना बहुत महत्वपूर्ण है| एक बच्चे की उंगलियों को कई नई
चीजों का आदी होना पड़ता है, जैसे कि बिना किसी समस्या के पेंसिल पकड़ना, पृष्ठ के भीतर और दो लाइनों में
मध्य लेखन कौशल को सीखना। कुछ क्रियाकलापों के माध्यम से उनकी उंगलियों को मजबूत करके इन क्रियाओं को सरल बनाया जाता है।

  • हाथ-आंख के समन्वय का विकास, हाथ की गतिविधियों पर नियंत्रण के स्तर को बढ़ाना, ताकि लिखने के लिए आवश्यक हाथों की गति का आदी /अभ्यस्त हो सके।
  • लेखन के लिए बाएं से दाएं की गति को पहचानना।
  • उन गतिविधियों की पहचान करना जो बच्चों को एक निश्चित पैटर्न की नकल करने के लिए प्रशिक्षण देने में

सहायता कर सकें जिससे बच्चे को कुछ पेंसिल स्ट्रोक सीखने में मदद मिले जो बाद में सभी प्रकार की लेखन गतिविधियों के लिए उपयोग किए जाते हैं। इन स्ट्रोक में शामिल हैं- , -, \, /,+, *, 0.

School Readiness/ विद्यालय तत्परता में अंक कौशल क्या है

विद्यालय तत्परता में अंक सीखने की तैयारी के लिए पहले पूर्व-संख्या की अवधारणाओं पर ध्यान केंद्रित करना, फिर संख्याओं (1-10) की पहचान करना और वह मात्रा जो उन संख्याओं को दर्शाती है और गिनना सीखाती है, बताई जाती है।

 विद्यालय तत्परता में पूर्व-संख्या की अवधारणाएं

पूर्व-संख्या की अवधारणाएं मूल रूप से बच्चे को समझने के लिए ऊंचाई, लंबाई, आकार, वजन/मात्रा, समय और
दूरी जैसे माप से संबंधित अवधारणाएं हैं। इसमें बड़ी-छोटी, लंबा-छोटा, तेज-धीमा, भारी-हल्का, मोटा-पतला,
अधिक-कम, चौड़ा-संकीर्ण, पहले-बाद और लंबा-छोटा जैसी अवधारणाओं के जोड़े शामिल हैं। साथ ही, एक-से-
एक की अवधारणा को बच्चे को समझाने की आवश्यकता है; इससे बच्चे को यह समझने में मदद मिलती है कि
जब हम जोड़ी बनाते हैं, तो एक वस्तु केवल एक अन्य वस्तु के साथ जाती है (गतिविधियों के माध्यम से समझाया
जा सकता है)। इसमें स्थिति की अवधारणा को भी शामिल किया जा सकता है (उदाहरण के लिए ऊपर-नीचे, यहां- वहां, अंदर -बाहर, ऑन-अंडर, फर्स्ट-लास्ट, हाई-लो, लेफ्ट-राइट, फ्रंट-बैक, पास-दूर)।

  • एक बार जब बच्चा पूर्व-संख्या अवधारणाओं को समझ लेता है, तब उसे संख्याओं के अनुक्रम , प्रत्येक संख्या कैसी दिखती है और यह कितनी मात्रा को दर्शाती से परिचित कराया जा सकता है | इस स्तर पर, हम संख्या -0 से शुरू करते हैं।
  • क्रम में गिनना संख्या की तैयारी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है | यह अवधारणा बच्चे के औपचारिक स्कूल में गणितीय कार्यों को शुरू करने में सक्षम होने के लिए आवश्यक है।

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Most Important Question and Answer
  1. कौन सा गणित पढ़ाने का एक तरीका नहीं है ?

Answer- बच्चों को अमूर्त से मूर्त की और लेकर जाना

2. कौन सी कौशलताएँ प्राथमिक कक्षाओं में नहीं पढ़ाई जाती है?

Answer- ऋणात्मक संख्याओं की संक्रियाएं

3. पहली कक्षा का एक बच्चा लाल और हरा रंग पहचान पाता है, लेकिन जब उसे एक डब्बे से लाल और हरे रंग के कंचो को अलग करने को कहा जाता है तब उसे इस कार्य में दिक्कत होती है |इस दिक्कत को दूर करने के लिए आप बच्चे के साथ क्या करेंगे ?
Answer- बच्चे को बार बार लाल और हरे रंग की अलग आग वस्तुएँ दिखाकर रंग की पहचान करवाएंगे

4. एक पहली कक्षा के एक बच्ची को आपने घटाव के इबारती सवाल हल करने के लिए कहा, लेकिन वह नहीं कर पाई | पर आपने जब उस सवाल को पढ़कर सुनाया, तो बच्ची ने उसे हल कर लिया | इस घटना से आप क्या निष्कर्ष निकाल सकते हैं?
Answer- बच्ची की घटाव की समझ तो है लेकिन उसे इबारती सवाल को समझ के साथ पढ़ने में मदद चाहिए

5. ‘स्कूल रैडिनेस कार्यक्रम’ का संचालन विद्यालय में किस कक्षा के बच्चों के साथ किया जाना चाहिए?

Answer- कक्षा 1 के बच्चों के साथ

6. ‘स्कूल रैडिनेस कार्यक्रम’ के अंतर्गत बच्चों के साथ से गतिविधियाँ कराने का क्या उदेश्य है?

Answer- a. बच्चों को विद्यालय के प्रति जुड़ाव पैदा करना
b. बच्चों को विद्यालय में सीखने के एक वातावरण तैयार करना
c. बच्चों को अपने साथियों एवं शिक्षकों के साथ अपनी बातें कहने का अवसर देना

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